चंदौली /चुनाव का सीजन आते ही जनप्रतिनिधि भेड़ियों की तरह झुंड में तमाम तरह के वादे करते नजर आते हैं साथ ही लोगों के पैरों पर गिरकर वोटों की भीख मांगते हैं लेकिन जैसे ही वह चुनाव जीत जाते हैं वैसे ही गिरगिट की तरह अपना रंग भी बदलना शुरू कर देते हैं और अपनी असली तस्वीर दिखाते हैं। अब बारी आती है जनता की जो कि प्रतिदिन उनके दरवाजे पर अपनी समस्या के निस्तारण के लिए हाजिरी लगाती है लेकिन फिर भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाता है जबकि ऐसा नहीं है कि उस समस्या के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों को अपने जेब से पैसे खर्च करने होते हैं सारा खर्चा सरकार वहन करती है लेकिन इनकी मिलीभगत के कारण कार्य केवल कागजों में ही अंकित होकर रह जाते हैं मौके केवल बदहाली के किस्से सुनाते हैं। स्वयं एशो आराम से रहने वाले गरीब और असहाय लोगों का दर्द भला किस प्रकार समझ सकते हैं।
पूरा मामला चंदौली जिले के वार्ड नंबर 12 गौतम नगर पंडित कमलापति त्रिपाठी हॉस्पिटल के पीछे का है जहां की आवागमन का रास्ता पूर्ण रूप से जलजमाव के कारण भर चुका है और नालियां बजबजा रही हैं जिसकी शिकायत कई बार वहां के जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री तक की गई लेकिन शिकायतकर्ता को केवल निराशा हाथ लगी सभी ने अपने हाथ खड़े कर लिए मजबूर होकर वार्ड वासियों को गंदे पानी से भरे बजबज आ रहे नालियों से होकर गुजारना पड़ता है तथा लोग कई बार उसमें गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।
क्या प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के सारे वादे केवल अखबारों तक ही सिमट कर रह जाते हैं या फिर उनके भाषण देने के बाद समाप्त हो जाते हैं आखिर फरियाद लेकर फरियादी कहां तक जाए।
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